आज America और Venezuelaके बीच बढ़ता टकराव एक बार फिर दुनिया की सुर्खियों में बना हुआ है। बयानों की तल्खी, धमकियों का दौर और प्रतिबंधों की मार—सब कुछ अब एक साथ चल रहा है। वॉशिंगटन से आने वाले सख्त संदेश हों या कराकास की जवाबी चेतावनियाँ, तस्वीर साफ है कि यह टकराव अब सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रहा। सवाल यह है कि इस पूरी लड़ाई की कीमत कौन चुका रहा है और आगे चुकाएगा ?
America–Venezuela Conflict:

अमेरिका और वेनेज़ुएला के बीच टकराव अब सिर्फ एक कूटनीतिक बयानबाज़ी नहीं रहा है । जिस तरह से अमेरिका ने वेनेज़ुएला पर सैन्य कार्रवाई की और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपने हिरासत में ले लिया है ! जिससे पूरी दुनिया चौंक गयी है । राजधानी काराकास में आधी रात हुए इस हमले, हवाई बमबारी और सत्ता परिवर्तन जैसी स्थिति ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है की — यह लड़ाई क्या ड्रग्स के खिलाफ है या तेल पर कब्ज़े की लड़ाई है ?
america सैन्य कार्रवाई को ड्रग तस्करी और गैंग वॉर के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना हैं कि इसकी असली वजह वेनेज़ुएला का विशाल तेल भंडार है। आज वेनेज़ुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शामिल है और वह लंबे समय से चीन को तेल की सप्लाई करता रहा है, यह अमेरिका को स्वीकार नहीं।
दुनिया हैरान! पाकिस्तान को मिली 5800 करोड़ की सहायता – आखिर इसके पीछे कौन?
america का कहना है कि वेनेज़ुएला की सत्ता लोकतांत्रिक मूल्यों से भटक चुकी है, और वहीं वेनेज़ुएला इस दावे को सीधा हस्तक्षेप और सत्ता परिवर्तन की कोशिश बता रहा है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं, लेकिन ज़मीन पर हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं। आर्थिक दबाव, अंतरराष्ट्रीय अलगाव और आंतरिक संकट—इन सबका असर आम लोगों की ज़िंदगी पर पड़ रहा है।
वेनेज़ुएला हमले के बाद दुनिया में बेचैनी

2 और 3 जनवरी की दरम्यानी रात काराकास पर हुए हवाई हमले ने पूरी दुनिया में चिंता बढ़ा दी। बताया गया कि करीब 150 अमेरिकी एयरक्राफ्ट ने राजधानी को निशाना बनाया। राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स की गिरफ्तारी की खबर ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया।
भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि वह पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर बनाए हुए है। यह बयान बताता है कि भारत इस संकट को हल्के में नहीं ले रहा।
राजनीति की जंग और असर जनता पर
जब कोई महाशक्ति वाला देश किसी अन्य देश पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाता है, तो कागज़ों में यह सिर्फ सरकार के खिलाफ एक कार्रवाई लगती है, लेकिन असल में इसकी मार आम लोगों को झेलनी पड़ती है । वेनेज़ुएला में इस समय यही हो रहा है।
लंबे समय हो रहे प्रतिबंधों के कारण देश की अर्थव्यवस्था बत से बत्तर हो गयी ।यहाँ खाने-पीने की चीज़ें बहुत महंगी हो हो गयी हैं , दवाइयों नही मिल रही हैहैं! और रोज़गार के सभी मौके खत्म हो चुके हैं। इसका आरोप सरकार और विपक्ष एक-दूसरे पर लगा रहे हैं, लेकिन आम आदमी कार् सिर्फ एक ही सवाल है की— आज हम अपना पेट कैसे भरे?
तेल की राजनीति और अमेरिका का सख़्त रुख

वेनेज़ुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में शामिल हैं और यही वजह है कि यह देश हमेशा वैश्विक ताकतों के निशाने पर रहता है । विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की सख़्ती के पीछे सिर्फ राजनीतिक कारण नहीं, बल्कि तेल और वैश्विक प्रभुत्व की रणनीति भी है।
अमेरिका नहीं चाहता कि वेनेज़ुएला जैसे संसाधन से संपन्न देश पर चीन और रूस का प्रभाव बढ़े। इसी वजह से वेनेज़ुएला पर अमेरिका द्दवारा दबाव बढ़ाया जा रहा है, बयान और धमकियाँ दी जा रही है ,और हर कदम एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लग रहा है।
दुनियाभर में तेल के भंडारों को लेकर एक जंग छिड़ी हुई है। रूस-यूक्रेन का युद्ध भी तेल के भंडारण को लेकर हो रहा है। अमेरिका इसे ड्रग तस्करों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई बता रहा है। लेकिन विदेश मामलों के जानकारोंने कहा है की अमेरिका ने वेनेजुएला पर ये सैन्य हमला तेल के भंडारण को अपने कब्जे में लेने के लिए किया है।
विदेश के मामलों के जानकार कमर आगा ने वेनेजुएला पर अमेरिका द्वारा किये हमले पर खुलकर बात की है । कमर आगा ने इस हमले को लेकर अमेरिका की बहुत निंदा कीहै और उन्होंने कहा है की , “हर देश के नागरिकों को ये अधिकार होता है कि वे अपने देश के राष्ट्रपति का खुद चुनाव करें, न कि किसी और देश की सरकार इस बात का निर्णय लेगी की वह का राष्ट्रपति कैसा होगा ,कौन होगा ।
उन्होंने ये भी कहा की अगर मादुरो एक खराब राष्ट्रपति थे तो वेनेजुएला की जनता उन्हें स्वयं बाहर करती इस पर अमेरिका को हस्तक्षेप करने की जरुरत नही थी !उन्होंने आगें कहा की अमेरिकी ऐसा पहले भी कर चुके हैं। यह पहली बार नहीं हुआ है कि उन्होंने किसी देश के राष्ट्रपति को किडनैप किया हो। अमेरिका कह रहा है कि वो वेनेजुएला को गबन कर देगा और अब यहां परअमेरिका की ही हुकुमत होगी।”
कमर आगा ने आगे कहा की , “”ये सभी लड़ाइयां, जो भी मिडिल ईस्ट में हो रही है, ईरान और रूस के बीच चल रही है, वो सब तेल के लिए ही हो रही हैं। ये लोग ईरान के लिए भी कह रहे हैं कि यहां भी सत्ता बदलनी चाहिए। ईरान के पास तेल और गैस बहुत हैं। वहीं रूस के पास भी गैस और तेल के भंडार हैं। अमेरिका काफी समय से कहता आ रहा है कि 21वीं सदी अमेरिका की है और इस सदी में अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए तेल पर अधिकार करना जरूरी है।”
कमर आगा आगे ये भी कहते हैं,की “इराक के साथ लड़ाई की भी तेल ही मुख्य वजह थी, जिसके कारण सद्दाम हुसैन को हटाया गया था। अमेरिका ने सऊदी अरब को नोटिस दिया है और उसमे कहा है कि उनके जितने भी एसेट्स हैं वो अमेरिका को दें दे, अमेरिका ने कहा की अब वही तेल निकालेंगे और बेचेंगे भी ।अमेरिका का एक मुख्य लक्ष्य है कि वो तेल के ऊपर अपना कब्ज़ा जमा ले।अमेरिका सबसे ताकतवर देश है, वो जो चाहता है वही करता है !अब कोई अंतरराष्ट्रीय कानून नही बचे!
वेनेज़ुएला के बाद अब आगे किस पर नजर?
विशेषज्ञों केअनुसार , वेनेज़ुएला के बाद अमेरिका की नजर कोलंबिया, क्यूबा और मेक्सिको जैसे देशों पर हो सकती है। हालांकि मेक्सिको के साथ सीधा टकराव अमेरिका के लिए आसान नहीं होगा, लेकिन लैटिन अमेरिका में अस्थिरता का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।