Shiv ji ki Arti|भोले बाबा की आरती जय शिव ओंकारा, भगवान शिव (शंकर जी) जी की आरती हिंदी में

Shiv ji ki Arti|भोले बाबा की आरती|शंकर जी की आरती|जय शिव ओंकारा,

Shiv ji ki Arti
Shiv ji ki Arti

शंकर जी की भक्ति करने से महान कृपा होती शंकर जी बहुत सीधे है , शंकर जी को भोले बाबा नाम से बुलाते है भोले बाबा बहुत बोले है , शंकर जी के दो पुत्र है गणेश जी और कार्तिकेय है , माँ पारवती भोले बाबा की आर्धन्गनी है भोले बाबा कैलाश पर्वत पर वास करते है|भोले बाबा की आरती

कमलवासिनी माँ लक्ष्मी की आरती: सुने और जीवन सफल बनाएं, लक्ष्मी जी के मंत्र , लक्ष्मी जी स्तुति :

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ 

ॐ हर हर हर महादेव॥ 

एकानन चतुरानन पंचानन राजे, प्रभु पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ 

ॐ हर हर हर महादेव॥ 

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे, प्रभु दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन मन मोहे॥ 

ॐ हर हर हर महादेव॥ 

अक्षमाला बनमाला मुण्डमाला धारी, शिव मुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद चंदा, सोहे त्रिपुरारी॥ 

ॐ हर हर हर महादेव॥ 

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे, शिव बाघम्बर अंगे।
ब्रह्मादिक सनकादिक भूतादिक संगे॥ 

ॐ हर हर हर महादेव॥ 

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता, शिव कर में त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगहर्ता जगपालनकर्ता॥ 

ॐ हर हर हर महादेव॥ 

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका, स्वामी जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ 

ॐ हर हर हर महादेव॥ 

त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ 

ॐ हर हर हर महादेव॥ 

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भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी स्तुति, भजन और आरती सबसे सरल उपाय हैं। कहा जाता है कि भगवान शिव की स्तुति करने से वह जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। यहां पढ़ें भगवान शिव की स्तुति।

भोले बाबा की आरती
भोले बाबा की आरती

भगवान शिव बहुत महान है भगवन शिव जी को देवो के देव महादेव कहते है

हर हर महादेव हर हर शम्भू हर हर महादेव|भोले बाबा की आरती

गणेश जी की आरती|Ganesh ji ki Aarti

भोले बाबा की आरती
भोले बाबा की आरती

श्री गणेश जी की आरती
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ जय …
एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी ॥ जय …
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ जय …
पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा ॥ जय …
‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ॥ जय …

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शिव चालीसा | Shiv Chalisa Lyrics in Hindi

दोहा ॥
श्री गणेश गिरिजा सुवन , मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

॥ चौपाई ॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥

अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे ॥

मैना मातु की हवे दुलारी ।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
या छवि को कहि जात न काऊ ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा ।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

किया उपद्रव तारक भारी ।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

तुरत षडानन आप पठायउ ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

आप जलंधर असुर संहारा ।
सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

किया तपहिं भागीरथ भारी ।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
जरत सुरासुर भए विहाला ॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

सहस कमल में हो रहे धारी ।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
करत कृपा सब के घटवासी ॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
संकट से मोहि आन उबारो ॥

मात-पिता भ्राता सब होई ।
संकट में पूछत नहिं कोई ॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
आय हरहु मम संकट भारी ॥

धन निर्धन को देत सदा हीं ।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

शंकर हो संकट के नाशन ।
मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
शारद नारद शीश नवावैं ॥

नमो नमो जय नमः शिवाय ।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

जो यह पाठ करे मन लाई ।
ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
पाठ करे सो पावन हारी ॥

पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

जन्म जन्म के पाप नसावे ।
अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

॥ दोहा ॥
नित नेम कर प्रातः ही, पाठ करौ चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥

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शिव जी के दोहे का पाठ करने से कार्य की पूर्ति होती है ,शिव जी बहुत दयालु है , शिव जी की कृपा हम सब पर बनी रहे

हर हर महादेव

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