Zomato CEO Change: Albinder Dhindsa की एंट्री से किसे होगा फायदा, किसे नुकसान?

Zomato CEO Change:

Zomato CEO Change
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भारत की जानी-मानी फूड-टेक कंपनी Zomato में एक बड़ा बदलाव हुआ है। कंपनी के को-फाउंडर Deepinder Goyal ने अपने CEO पद से इस्तीफा दे दिया है ! और उनकी जगह पर Blinkit के फाउंडर और CEO  Albinder Dhindsa को Zomato का नया CEO नियुक्त किया गया है। यह फैसला एक चेहरा बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बदलाव से Zomato की आने वाली रणनीति, बिज़नेस मॉडल और करोड़ों यूज़र्स पर सीधा असर पड़ने वाला है।

इस बदलाव के बाद सबके मन में अब एक ही सबसे बड़ा सवाल है—Albinder Dhindsa की एंट्री से किसे फायदा होगा और किसे नुकसान?

Albinder Dhindsa कौन हैं? :

Albinder Singh Dhindsa भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम का जाना-माना नाम हैं।उन्होंने IIT दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में Columbia Business School (USA) से MBA किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कंसल्टिंग और टेक सेक्टर में काम किया, लेकिन असली पहचान उन्हें स्टार्टअप दुनिया से मिली।

Albinder Dhindsa Blinkit (पहले Grofers) के को-फाउंडर और CEO रहे हैं। Blinkit को भारत में 10–15 मिनट में ग्रॉसरी डिलीवरी के कॉन्सेप्ट का चेहरा माना जाता है। 2022 में Zomato ने Blinkit को खरीद लिया , लेकिन इसके बाद भी Dhindsa को कंपनी की कमान सौंपी गई।उनके नेतृत्व में Blinkit लगातार घाटे से निकलकर Zomato Group का सबसे तेज़ी से बढ़ता बिज़नेस वर्टिकल बन गया।

यही वजह के कारण बोर्ड ने उन्हें पूरे Eternal (Zomato Group) का CEO बनाने का फैसला किया।

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साल 2011 में जॉइन किया जोमैटो

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Albinder Dhindsa ने साल 2011 में जोमैटो कंपनी को जॉइन किया,और वहा वो हेड ऑफ इंटरनेशनल एक्सपेंशन रहे और वंहा उन्होंने कंपनी के ग्लोबल विस्तार की जिम्मेदारी संभाली. जोमैटो को छोड़ने के बाद अल्बिंदर ढिंडसा ने Grofers कंपनी की शुरुआत की, जिसे बाद में उसे Blinkit के नाम से रीब्रांड किया गया. 2022 में जोमैटो ने Blinkit को खरीद लिया और Blinkit इटर्नल का हिस्सा बन गया.

Albinder Dhindsa की Net Worth:

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Albinder Dhindsa की नेट वर्थ की सटीक जानकारी सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं की गई है, लेकिन स्टार्टअप और बिज़नेस रिपोर्ट्स के अनुसार:

  • Blinkit और Zomato में उनकी हिस्सेदारी है !
  • स्टॉक ऑप्शंस (ESOPs) से उनकी कमाई होती है !
  • सैलरी और इंसेंटिव्स भी मिलता है

इन सब को मिलाकर उनकी अनुमानित नेट वर्थ ₹800 करोड़ से ₹1,200 करोड़ के बीच बताई जाती है।
यह आंकड़ा समय और शेयर प्राइस के साथ बदलता रहता है, लेकिन इतना साफ है कि Dhindsa आज भारत के सबसे अमीर और प्रभावशाली स्टार्टअप लीडर्स में गिने जाते हैं।

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Albinder Dhindsa के CEO बनने से किसे होगा फायदा?

माना जा रहा है की सबसे बड़ा फायदा Quick Commerce और Blinkit बिज़नेस को मिलने की उम्मीद है। Dhindsa की सबसे बड़ी ताकत execution और speed है। वे लागत कम करने, delivery टाइम घटाने और यूनिट इकोनॉमिक्स को सुधारने के लिए जाने जाते हैं।Investors के लिए यह बदलाव सबसे अच्छा माना जा रहा है, क्योंकि Blinkit पहले ही मुनाफे की ओर बढ़ रहा है और Zomato का फोकस अब सिर्फ फूड डिलीवरी पर न रहकर नहीं, बल्कि multi-business ecosystem पर होगा

इससे Customers को भी फायदा मिल सकता है—जैसे तेज़ डिलीवरी, बेहतर ऐप इंटीग्रेशन और ज्यादा ऑफर्स देखने को मिल सकते हैं।

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Albinder Dhindsa की एंट्री से किसे होगा फायदा, किसे नुकसान:

Albinder Dhindsa के seo बनाने के बाद अब सबसे बड़ी चिंता Zomato की core food-delivery टीम को लेकर है।
Dhindsa का अनुभव ज़्यादातर quick commerce में रहा है, ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि food delivery बिज़नेस को अब उतनी प्राथमिकता नही मिलेगी जितनी पहले मिलती थी।

zomato के कुछ पुराने कर्मचारी और Deepinder Goyal से जुड़े लोग भी इस बदलाव को लेकर थोडा असहज महसूस कर रहे है , क्योंकि अब कंपनी की कार्यशैली और उसके निर्णय लेने के तरीके बदल सकते है।Delivery partners के लिए भी अभी शुरुआत में अनिश्चितता रह सकती है क्यूंकि नई रणनीति, नए टारगेट और operational बदलाव उनके काम को प्रभावित कर सकते हैं।

Zomato में आगे क्या बदलेगा:

Albinder Dhindsa के आने से संकेत मिल रहे है की Zomato अब Quick commerce पर ज्यादा दांव लगाएगा और Speed, efficiency और profitability को प्राथमिकता देगा और वह Food delivery को ecosystem का हिस्सा बनाए रखेगा, लेकिन अकेला फोकस नहीं रहेगा !यह बदलाव Zomato को एक फूड-टेक कंपनी से टेक-ड्रिवन डिलीवरी प्लेटफॉर्म में बदल सकता है।

निष्कर्ष:

Zomato में CEO का बदलना सिर्फ एक नाम बदलने की प्रक्रिया नही है।Albinder Dhindsa की एंट्री अब कंपनी के आने वाले भविष्य की दिशा तय करेगी।
Investors और Blinkit यूज़र्स को इससे फायदा होता दिख रहा है, जबकि food delivery से जुड़े लोगों के लिए यह एक टेस्टिंग फेज हो सकता है।

आने वाले महीनों में Dhindsa के फैसले ही तय करेंगे कि यह बदलाव Zomato के लिए गेम-चेंजर साबित होगा या रिस्क भरा दांव

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