
Donald Trump का बड़ा बयान:
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में एक ऐसे बिल का समर्थन किया है, जिससे भारत पर 500% तक भारी टैरिफ (import duty) लगने की संभावना हो सकती है । यह सिर्फ व्यापार का मामला नहीं, बल्कि यह वैश्विक राजनीति और आर्थिक दबाव का बड़ा मुद्दा बन गया है।
Donald Trump ने क्या किया?
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने “Sanctioning Russia Act of 2025” नामक बिल को मंजूरी दे दी है। जिस बिल के तहत अमेरिका उन सभी देशों पर टैरिफ लगा सकता है, जो रूस के तेल या पेट्रोलियम उत्पादों का आयात अपने देश में जारी रखते हैं।
अगर यह बिल लागू हो गया तो, अमेरिका भारत जैसे देशों के सामानों पर 500% तक का Tariff लगा सकता है , जो ट्रेड रिश्तों में एक बहुत बढ़ी बढ़ोतरी होगी।
Sanctioning Russia Act 2025 क्या है?
“Sanctioning Russia Act of 2025” एक अमेरिका की संसदीय विधेयक है जिसे Donald Trump द्वारा समर्थन दिया गया है। इस विधेयक के द्वारा अमेरिका उन सभी देशों पर 500% तक टैरिफ लगा सकता है जो रूस से तेल या पेट्रोलियम उत्पाद खरीदते हैं। ट्रंप और उनके समर्थकों का कहना है कि इस विधेयक के समर्थ के से रूस द्वारा यूक्रेन पर जारी आक्रमण को आर्थिक रूप से दबाया जा सकेगा।
बिल अभी कानून के रूप में पारित नहीं हुआ है, लेकिन इसके पहले भी ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25% और कुल मिलाकर 50% तक टैरिफ लगा दिया था।
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500% Tariff का मतलब है?
- Tariff का मतलब साफ़ शब्दों में आयात शुल्क है — वह tax है जो एक देश द्वारा दूसरे देश के सामान पर लगाया जाता है।
- सामान्य तौर पर यह 10%–30% तक होता है, लेकिन 500% तक का टैरिफ एक देश का दूसरे देश पर भारी-भरकम आर्थिक दंड माना जाता है।
- 500%का मतलब यह है कि यदि भारत से कोई सामान अमेरिका जाएगा, तो उस पर मूल कीमत से पांच गुना ज्यादा tax लगेगा , जिससे भारत का सामान अमेरिकी बाजार में बिकना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
500% Tariff से शेयर बाजार और आर्थिक असर
500% Tariff के प्रस्ताव के बाद भारत के शेयर मार्केट में भारी गिरावट देखी गई है।कुछ कंपनियों के शेयरों के भाव 13% तक नीचे गिर गये है !
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसा टैरिफ लागू होता है, तो यह निवेशकों की धारणा को प्रभावित करेगा और विदेशी पूंजी भारत से बाहर चली जाएगी !
भारत पर लग चुके है Tariffs
डोनाल्ड ट्रंप ने पहले भी भारत पर 25%का tariff लगाया था, जिसे बाद में कुल 50% तक बढ़ाया दिया गया था।इसका कारण, भारत का रूस से तेल या पेट्रोलियम उत्पाद का आयात करना जो अमेरिका को पसंद नहीं आई थी।
लेकिन भारत सरकार ने अमेरिका के इस फैसले को “unfair और unjustified” बताया था और कहा था कि यह फैसला भारतऔर अमेरिका के व्यापार में असंतुलन पैदा कर सकता है।
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भारत की प्रतिक्रिया और रणनीति
भारत ने अमेरिका को संकेत दिया है कि वह एक प्रतिशोधी (retaliatory) कदम उठाने के बजाय बैठ कर बात करने और ट्रेड डीलिंग को प्राथमिकता देगा। कई अधिकारियों का कहना है कि यदि सहयोगपूर्ण समाधान खोजे तो दोनों देशों के लिए बेहतर नतीजे निकल सकते हैं।
टैरिफ का भारत-अमेरिका व्यापार पर संभावित प्रभाव

1- भारतीय निर्यात पर भारी प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है की यदि भारत पर 500% Tariff लगा तो इससे भारत के टेक्सटाइल, समुद्री उत्पादन, ज्वेलरी और चमड़ा उद्योग जैसे श्रम-प्रधान उद्योगों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा और इन उत्पादों के महंगे होने से उनकी प्रतिस्पर्धी क्षमता भी कम हो जाएगी
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2- भारत की GDP और वृद्धि दर पर असर
कुछ रिपोर्टों के अनुसार यदि भारत पर यह टैरिफ लागू होता है, तो भारत की GDP वृद्धि दर में 0.3–0.4% तक की गिरावट आ सकती है।
हालांकि अभी भारत की घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र में मजबूती दिख रही हैं, जो कुल अर्थव्यवस्था को थोड़ा समर्थन दे सकता है !
3- भारत के वैश्विक सप्लाई चेन में उलझन
भारत अमेरिका को बहुत से ऐसे इनपुट्स देता है जिन पर यदि अब Tariff बढ़ा तो अमेरिकी कंपनियों को भी यह महँगा पड़ेगा। इससे वैश्विक सप्लाई चेन में भारी उलझन बढ़ सकती है।
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आखिर क्यों ऐसा कदम उठाया जा रहा है?

अमेरिकाने कहा है कि यह कानून रूस के समर्थन को रोकने के लिए आर्थिक दबाव का एक तरीका है| यह उन देशों पर है जो रूस से ऊर्जा खरीदते हैं। ट्रंप और उनके समर्थकों के अनुसार, इसका मुख्य लक्ष्य रूसी तेल बाजार को कमजोर करना है।
कुछ विश्लेषको का मानना है की यह कदम वैश्विक व्यापार संतुलन में एक बदलाव के लिए उठाया जा रहा है।
क्या होगा अगर 500% Tariff लागू हो गया?
भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका में प्रतिस्पर्धा मुश्किल हो जायेगी !
भारतीय निर्यात को नई बाजारों की तलाश होगी!
वैश्विक व्यापार के संबंधों में तनाव बढ़ने की आशंका हो सकती है !
निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक असर पड़ेगा !
भारत को एक अलग नई रणनीति को अपनाना पड़ेगा !
निष्कर्ष (Conclusion)
Donald Trump का यह बयान और समान रूप से पारित हो सकता कानून वैश्विक व्यापार के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। भारत-अमेरिका के बीच आर्थिक और राजनैतिक संबंधों पर सीधा असर पड़ेगा, और यह मुद्दा केवल एक tariff से बढ़कर एक द्विपक्षीय रणनीतिक वार्ता का विषय बन चुका है।