चक्रवात मोन्था:

भारत के पूर्वी तट पर रहने वाले लोगों की जुबान पर इस समय बस एक ही नाम है- ‘मोन्था’ (Montha)।यह शक्तिशाली चक्रवाती तूफान बंगाल की खाड़ी में उठा है , जो मंगलवार (28 अक्टूबर 2025) की रात को आंध्र प्रदेश के तट से टकराया, और अपने पीछे तबाही के कई निशान छोड़ गया है।
यह तूफान ‘गंभीर चक्रवाती तूफान’ (Severe Cyclonic Storm) की श्रेणी में पहुँचा गया हैं और इसने आंध्र प्रदेश के साथ-साथ ओडिशा और तमिलनाडु के कई हिस्सों में तबाही मचाई है !
किश्तवाडा में बादल फटने से तबाही , कई लोगों की मौत,
लेकिन यह ‘मोन्था’ है क्या? इसका यह अजीब सा नाम कहाँ से आया? और यह कहाँ-कहाँ सबसे ज्यादा कहर बरपा रहा है? आज हम इस ब्लॉग के द्वारा मोन्था तूफान से जुड़ी हर बात को समझेंगे और इसके बारे में जानेंगे !
क्या है चक्रवात मोन्था ?
चक्रवात ‘मोन्था’ एक उष्णकटिबंधीय तूफान (Tropical Cyclone) है जिसकी शुरुआत कुछ दिन पहले ही बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव के क्षेत्र (Low-Pressure Area) के रूप में हुई थी।
- कैसे बना तूफान: समुद्र का गर्म पानी (लगभग 27 डिग्री सेल्सियस से ऊपर) और नमी वाली हवा इसके लिए ईंधन का काम करती है। धीरे-धीरे यह दबाव और गहरा होता गया और ‘चक्रवाती तूफान’ में बदल गया।
- कितना शक्तिशाली: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, ‘मोन्था’ ने और ताकत बटोरकर ‘गंभीर चक्रवाती तूफान’ का रूप ले लिया। जब इसने तट पर दस्तक दी (जिसे ‘लैंडफॉल’ कहते हैं), तब हवा की रफ्तार 90 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जो बीच-बीच में 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक भी पहुँची।
कहाँ मचा रहा है तबाही? (लैंडफॉल और प्रभाव)

IMD के अनुसार, चक्रवात ‘मोन्था’ ने मंगलवार (28 अक्टूबर 2025) की शाम/रात को आंध्र प्रदेश के तट पर मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच, काकीनाडा के पास लैंडफॉल किया।
तूफान का सबसे ज्यादा असर इन तीन राज्यों पर देखा जा रहा है:
1.आंध्र प्रदेश (सबसे गंभीर असर):
- रेड अलर्ट: तटीय जिलों जैसे काकीनाडा, कोनासीमा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिम गोदावरी, कृष्णा और गुंटूर में रेड अलर्ट जारी किया गया।
- भारी बारिश और तेज हवाएं: इन इलाकों में 200 मिमी से भी ज्यादा भारी बारिश दर्ज की गई है। तेज हवाओं से हजारों पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंभे गिर गए और कई इलाकों में बिजली गुल हो गई।
- नुकसान: फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है, खासकर धान की फसल जो कटाई के लिए तैयार थी। निचले इलाकों में पानी भर गया है और कई घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। एक महिला की मौत की खबर भी आई है।
2.ओडिशा (हाई अलर्ट):
- प्रभावित जिले: दक्षिणी ओडिशा के जिले जैसे मलकानगिरी, कोरापुट, रायगढ़ा, गजपति और गंजम में तूफान का असर दिखा।
- बारिश: इन जिलों में भारी बारिश हुई, जिससे कुछ जगहों पर मामूली भूस्खलन (Landslides) भी हुआ।
- बचाव कार्य: तूफान के खतरे को देखते हुए, ओडिशा सरकार ने पहले ही NDRF और ODRAF की 140 से ज्यादा टीमों को तैनात कर दिया था और हजारों लोगों को सुरक्षित आश्रय गृहों में पहुँचाया।
- तमिलनाडु और तेलंगाना:
- तूफान के असर से उत्तरी तमिलनाडु (चेन्नई समेत) और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में भी मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई।
मोन्था नाम का मतलब क्या है और यह कैसे पड़ा?

किसी तूफान का नाम ‘मोन्था’ क्यों रखा गया?
- किसने दिया यह नाम: यह नाम थाईलैंड (Thailand) ने दिया है।
- ‘मोन्था’ का अर्थ: थाई भाषा में ‘मोन्था’ का मतलब होता है “एक खुशबूदार या सुंदर फूल”। यह विडंबना ही है कि इतने सुंदर नाम वाले तूफान ने इतनी तबाही मचाई है।
तूफानों को नाम क्यों दिया जाता है?
पहले तूफानों को उनके साल या लोकेशन से जाना जाता था, जो बहुत भ्रामक (confusing) था। 1950 के दशक के बाद, इन्हें नाम देने की प्रथा शुरू हुई।
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नाम देने के मुख्य कारण:
- स्पष्ट पहचान: एक समय में एक से ज्यादा तूफान होने पर, नाम से उन्हें पहचानना आसान होता है।
- आसान संचार: वैज्ञानिकों, मीडिया और आम जनता के लिए ‘मोन्था’ बोलना, किसी तकनीकी कोडनेम से ज्यादा आसान है।
- जागरूकता: नाम वाले तूफान से लोग खतरे को ज्यादा गंभीरता से लेते हैं और चेतावनियाँ तेजी से फैलती हैं।
नाम कैसे चुना जाता है? (पूरी प्रक्रिया)
- कौन तय करता है: उत्तर हिंद महासागर (बंगाल की खाड़ी और अरब सागर) में आने वाले तूफानों का नाम नई दिल्ली स्थित IMD का क्षेत्रीय केंद्र (RSMC) तय करता है।
- 13 देशों का पैनल: इसके लिए 13 सदस्य देशों (भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, श्रीलंका, ओमान, यूएई, यमन, कतर, ईरान, सऊदी अरब और मालदीव) का एक पैनल है।
- नामों की लिस्ट: 2020 में, इन सभी 13 देशों ने 13-13 नाम सुझाए। कुल 169 नामों की एक नई सूची तैयार की गई।
- क्रम में उपयोग: जैसे ही कोई तूफान एक तय गति (62 किमी/घंटा) पर पहुँचता है, उसे इस सूची का अगला उपलब्ध नाम दे दिया जाता है।
- अगला नाम: ‘मोन्था’ (थाईलैंड का नाम) के बाद, अगला तूफान जो भी आएगा, उसका नाम ‘सेनयार’ (Senyar) होगा, जो यूएई (UAE) द्वारा सुझाया गया है।
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मोन्था की ताजा स्थिति और आगे क्या?
लैंडफॉल करने के बाद, तूफान ‘मोन्था’ जमीन पर पहुँचते ही कमजोर पड़ने लगा है। बुधवार (29 अक्टूबर 2025) की सुबह तक यह ‘गंभीर चक्रवाती तूफान’ से कमजोर होकर ‘चक्रवाती तूफान’ और फिर ‘डीप डिप्रेशन’ (गहरे दबाव) में बदल गया।
हालांकि, इसका असर अभी खत्म नहीं हुआ है। यह सिस्टम जैसे-जैसे जमीन पर आगे बढ़ेगा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा के अंदरूनी हिस्सों में भारी बारिश करता रहेगा। प्रशासन अभी भी हाई अलर्ट पर है और बचाव व राहत कार्य तेजी से जारी है।
संक्षेप में, ‘मोन्था’ इस सीजन का एक विनाशकारी तूफान साबित हुआ है, जिसने एक बार फिर हमें प्रकृति की असीम शक्ति और आपदा प्रबंधन की तैयारियों के महत्व की याद दिला दी है।